रविवार, 3 मई 2015

‘प्रज्ञा साहित्य सम्मान-2015’

मुख्य अतिथि श्री मनीष ग्रोवर, रोहतक विधायक के हाथों सम्मान हासिल करते हुए राजेश कश्यप।
        मेरा परमसौभाग्य है कि आज रोहतक (हरियाणा) की शीर्ष 60 विशिष्ट एवं प्रख्यात साहित्यकार विभूतियों के साथ ‘प्रज्ञा साहित्य सम्मान-2015’ हासिल करने का गौरव मिला। यह विशिष्ट सम्मान-समारोह ‘प्रज्ञा साहित्यिक मंच, हरियाणा’ के तत्वाधान में माता ‘इन्द्रा स्वप्न’ की प्रेरणा से आयोजित किया गया था। निःसन्देह, यह मेरे लिये गर्व एवं गौरव का ऐतिहासिक और चिरस्मरणीय पल रहेगा। मैं इस अमूल्य सम्मान एवं आशीर्वाद के लिए मंच के अध्यक्ष श्री मुधकांत, सचिव श्री हरनाम शर्मा और संयोजक श्री मंजूल पालीवाल जी का तहेदिल से आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ। 

मुख्य अतिथि श्री मनीष ग्रोवर, रोहतक विधायक एवं सम्मानित साहित्यकारों के साथ राजेश कश्यप।
     इसके साथ ही मैं ‘प्रज्ञा साहित्यिक मंच’ के सभी सदस्यों और जिला रोहतक की उन महान विशिष्ट विभूतियों का भी तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने मुझे अपने बीच बैठने का सौभाग्य दिया। मैं समारोह के मुख्य अतिथि माननीय विधायक श्री मनीष गौरव, वरिष्ठ अतिथि वयोवृद्ध साहित्यकार डॉ. हरिश्चन्द्र वर्मा और विशिष्ट अतिथि डॉ. श्याम सखा श्याम, पूर्व निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी का विशेष तौरपर आभारी हूँ, जिन्होंने अपने शुभ-कर कमलों से आशीर्वाद दिया। मैं हरियाणा साहित्य मनीषी श्री रामफल चहल जी का तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे चद्दर व पटका पहनाकर ‘प्रज्ञा साहित्य सम्मान-2015’ का साक्षी बनाया। आप सब मित्रों का भी मैं बेहद धन्यवादी हूँ, जो मुझे निरन्तर प्रेरित करते रहते हैं और हौंसला बढ़ाते रहते हैं। मैं राजेश कश्यप आप सबका तहेदिल से पुनः आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ। अपना स्नेह, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन बनाये रखियेगा। शुक्रिया।

गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

जानिए ‘मजदूर दिवस’ की महत्ता और उसका इतिहास

1 मई/अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस विशेष
मई दिवस : 
May Diwas Collage by Rajesh Kashyap

जानिए ‘मजदूर दिवस’ की महत्ता और उसका इतिहास 
- राजेश कश्यप



                          एक मई अर्थात अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस। यह दिवस विशेषकर मजदूरों के लिए अपनी एकता प्रदर्शित करने का दिन माना जाता है। मजदूर लोग अपने अधिकारों एवं उनकी रक्षा को लेकर प्रदर्शन करते हैं। अगर आज के परिदृश्य में यदि हम मजदूर दिवस की महत्ता का आकलन करें तो पाएंगे कि इस दिवस की महत्ता पहले से भी कहीं ज्यादा हो गई है। वैश्विक पटल पर एक बार फिर पूंजीवाद का बोलबाला सिर चढ़कर बोल रहा है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ने सदैव गरीब मजदूरों का शोषण किया है, उनके अधिकारों पर कुठाराघात किया है और उन्हें जिन्दगी के उस पेचीदा मोड़ पर पहुंचाया है, जहां वह या तो आत्महत्या करने के लिए विवश होता है, या फिर उसे अपनी नियति को कोसते हुए भूखा-नंगा रहना पड़ता है।
                           सन् 1750 के आसपास यूरोप में औद्योगिक क्रांति हुई। उसके परिणामस्वरूप मजदूरों की स्थिति अत्यन्त दयनीय होती चली गई। मजदूरों से लगातार 12-12 और 18-18 घण्टों तक काम लिया जाता, न कोई अवकाश की सुविधा और न दुर्घटना का कोई मुआवजा। ऐसे ही अनेक ऐसे मूल कारण रहे, जिन्होंने मजदूरों की सहनशक्ति की सभी हदों को चकनाचूर कर डाला। यूरोप की औद्योगिक क्रांति के अलावा अमेरिका, रूस, आदि विकसित देशों में भी बड़ी-बड़ी क्रांतियां हुईं और उन सबके पीछे मजदूरों का हक मांगने का मूल मकसद रहा। 
                         अमेरिका में उन्नीसवीं सदी की शुरूआत में ही मजदूरों ने ‘सूर्योदय से सूर्यास्त’ तक काम करने का विरोध करना शुरू कर दिया था। जब सन् 1806 में फिलाडेल्फिया के मोचियों ने ऐतिहासिक हड़ताल की तो अमेरिका सरकार ने साजिशन हड़तालियों पर मुकदमे चलाए। तब इस तथ्य का खुलासा हुआ कि मजदूरों से 19-20 घण्टे बड़ी बेदर्दी से काम लिया जाता है। उन्नीसवीं सदी के दूसरे व तीसरे दशक में तो मजदूरों में अपने हकों की लड़ाई के लिए खूब जागरूकता आ चुकी थी। इस दौरान एक ‘मैकेनिक्स यूनियन ऑफ फिलाडेल्फिया’ नामक श्रमिक संगठन का गठन भी हो चुका था। यह संगठन सामान्यतः दुनिया की पहली टेªड युनियन मानी जाती है। इस युनियन के तत्वाधान में मजदूरों ने वर्ष 1827 में एक बड़ी हड़ताल की और काम के घण्टे घटाकर दस रखने की मांग की। इसके बाद इस माँग ने एक बहुत बड़े आन्दोलन का रूप ले लिया, जोकि कई वर्ष तक चला। बाद में, वॉन ब्यूरेन की संघीय सरकार को इस मांग पर अपनी मुहर लगाने को विवश होना ही पड़ा। 
                          इस सफलता ने मजदूरों में एक नई ऊर्जा का संचार किया। कई नई युनियनें ‘मोल्डर्स यूनियन’, ‘मेकिनिस्ट्स युनियन’ आदि अस्तित्व में आईं और उनका दायरा बढ़ता चला गया। कुछ दशकों बाद आस्टेªलिया के मजदूरों ने संगठित होकर ‘आठ घण्टे काम’ और ‘आठ घण्टे आराम’ के नारे के साथ संघर्ष शुरू कर दिया। इसी तर्ज पर अमेरिका में भी मजदूरों ने अगस्त, 1866 में स्थापित राष्ट्रीय श्रम संगठन ‘नेशनल लेबर यूनियन’ के बैनर तले ‘काम के घण्टे आठ करो’ आन्दोलन शुरू कर दिया। वर्ष 1868 में इस मांग के ही ठीक अनुरूप एक कानून अमेरिकी कांग्रेस ने पास कर दिया। अपनी मांगों को लेकर कई श्रम संगठनों ‘नाइट्स ऑफ लेबर’, ‘अमेरिकन फेडरेशन ऑफ लेबर’ आदि ने जमकर हड़तालों का सिलसिला जारी रखा। उन्नीसवीं सदी के आठवें व नौंवे दशक में हड़तालों की बाढ़ सी आ गई थी। 
                          ‘मई दिवस’ मनाने की शुरूआत दूसरे इंटरनेशनल द्वारा सन् 1886 में हेमार्केट घटना के बाद हुई। दरअसल, शिकागों के इलिनोइस (संयुक्त राज्य अमेरिका) में तीन दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया था। इसमें 80,000 से अधिक आम मजदूरों, कारीगरों, व्यापारियों और अप्रवासी लोगों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। हड़ताल के तीसरे दिन पुलिस ने मेकॉर्मिक हार्वेस्टिंग मशीन कंपनी संयंत्र में घुसकर शांतिपूर्वक हड़ताल कर रहे मजदूरों पर फायरिंग कर दी, जिसमें संयंत्र के छह मजदूर मारे गए और सैंकड़ों मजदूर बुरी तरह घायल हो गए। इस घटना के विरोध में अगले दिन 4 मई को हेमार्केट स्क्वायर में एक रैली का आयोजन किया गया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी, एक अज्ञात हमलावर ने पुलिस के दल पर बम फेंक दिया। इस विस्फोट में एक सिपाही की मौत हो गई। इसके बाद मजदूरों और पुलिस में सीधा खूनी टकराव हो गया। इस टकराव में सात पुलिसकर्मी और चार मजदूर मारे गए तथा दर्जनों घायल हो गए।
                           इस घटना के बाद कई मजदूर नेताओं पर मुकदमें चलाए गए। अंत में न्यायाधीश श्री गैरी ने 11 नवम्बर, 1887 को कंपकंपाती और लड़खड़ाती आवाज में चार मजदूर नेताओं स्पाइडर, फिशर, एंजेल तथा पारसन्स को मौत और अन्य कई लोगों को लंबी अवधि की कारावास की सजा सुनाई। इस ऐतिहासिक घटना को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1888 में अमेरिकन फेडरेशन ऑफ लेबर ने इसे मजदूरों के बलिदान को स्मरण करने और अपनी एकता को प्रदर्शित करते हुए अपनी आवाज बुलन्द करने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही 14 जुलाई, 1888 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में विश्व के समाजवादी लोग भारी संख्या में एकत्रित हुए और अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी संगठन (दूसरे इंटरनेशनल) की नींव रखी। इस अवसर पर संयुक्त प्रस्ताव पारित करके विश्वभर के मजदूरों के लिए कार्य की अधिकतम अवधि को आठ घंटे तक सीमित करने की माँग की गई और संपूर्ण विश्व में प्रथम मई को ‘मजदूर दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। 
                          ‘मई दिवस’ पर कई जोशिले नारों ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। समाचार पत्र और पत्रिकाओं में भी मई दिवस पर विचारोत्तेजक सामग्रियां प्रकाशित हुईं। ‘मई दिवस’ के सन्दर्भ में ‘वर्कर’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र में चार्ल्स ई. रथेनबर्ग ने लिखा, ‘‘’मई-दिवस, वह दिन जो पूंजीपतियों के दिल में डर और मजदूरों के दिलों में आशा पैदा करता है।’ इसी पत्र के एक अन्य ‘मई दिवस विशेषांक’ में यूजीन वी. डेब्स ने लिखा, ‘यह सबसे पहला और एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। यह मजदूर के सरोकार रखता है और क्रांति को समर्पित है।’
                          ‘मई दिवस’ को इंग्लैण्ड में पहली बार वर्ष 1890 में मनाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे सभी देशों में प्रथम मई को ‘मजदूर दिवस’ अर्थात ‘मई दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। वैसे मई दिवस का प्रथम इश्तिहार रूस की जेल में ब्लाडीमीर इलियच उलियानोव लेनिन ने वर्ष 1886 में ही लिख दिया था। भारत में मई दिवस मनाने की शुरूआत वर्ष 1923 से, चीन में वर्ष 1924 से और स्वतंत्र वियतनाम में वर्ष 1975 से हुई। वर्ष 1917 मजदूर संघर्ष का स्वर्णिम दौर रहा। इस वर्ष रूस में पहली बार सशक्त मजदूर शक्ति ने पंूजीपतियों की सत्ता को उखाड़ फेंका और अपने मसीहा लेनिन के नेतृत्व में ‘बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी’ की सर्वहारा राज्यसत्ता की स्थापना की। विश्व इतिहास की यह महान घटना ‘अक्तूबर क्रांति’ के नाम से जानी जाती है। 
                         वर्ष 1919 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ.) के प्रथम अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया गया कि सभी औद्योगिक संगठनों में कार्यावधि अधिक-से-अधिक आठ घंटे निर्धारित हो। इसके साथ ही श्रम संबंधी अन्य अनेक शर्तों को भी कलमबद्ध किया गया। विश्व के अधिकतर देशों ने इन शर्तों को स्वीकार करते हुए उन्हें लागू भी कर दिया। आगे चलकर वर्ष 1935 में इसी संगठन ने आठ घंटे की अवधि को घटाकर सात घंटे की अवधि का प्रस्ताव पारित करते हुए यह भी कहा कि एक सप्ताह में किसी भी मजदूर से 40 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का अनुसरण आज भी विश्व के कई विकसित एवं विकासशील देशों में हो रहा है। 
                          इस पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से लड़ने एवं अपने अधिकारों को पाने और उनकी सुरक्षा करने के लिए मजदूरों को जागरूक एवं संगठित करने का बहुत बड़ा श्रेय साम्यवाद के जनक कार्ल मार्क्स को जाता है। कार्ल मार्क्स ने समस्त मजदूर-शक्ति को एक होने एवं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया था। कार्ल मार्क्स ने जो भी सिद्धान्त बनाए, सब पूंजीवादी अर्थव्यस्था का विरोध करने एवं मजदूरों की दशा सुधारने के लिए बनाए थे।
                           कार्ल मार्क्स का पहला उद्देश्य श्रमिकों के शोषण, उनके उत्पीड़न तथा उन पर होने वाले अत्याचारों का कड़ा विरोध करना था। कार्ल मार्क्स का दूसरा मुख्य उद्देश्य श्रमिकों की एकता तथा संगठन का निर्माण करना था। उनका यह उद्देश्य भी बखूबी फलीभूत हुआ और सभी देशों में श्रमिकों एवं किसानों के अपने संगठन निर्मित हुए। ये सब संगठन कार्ल मार्क्स के नारे, ‘‘दुनिया के श्रमिकों एक हो जाओ’’ ने ही बनाए। इस नारे के साथ कार्ल मार्क्स मजदूरों को ललकारते हुए कहते थे कि ‘‘एक होने पर तुम्हारी कोई हानि नहीं होगी, उलटे, तुम दासता की जंजीरों से मुक्त हो जाओगे’’।
                          कार्ल मार्क्स चाहते थे कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित हो, जिसमें लोगों को आर्थिक समानता का अधिकार हो और जिसमें उन्हें सामाजिक न्याय मिले। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को कार्ल मार्क्स समाज व श्रमिक दोनों के लिए अभिशाप मानते थे। वे तो हिंसा का सहारा लेकर पूंजीवाद के विरूद्ध लड़ने का भी समर्थन करते थे। इस संघर्ष के दौरान उनकीं प्रमुख चेतावनी होती थी कि वे पूंजीवाद के विरूद्ध डटकर लड़ें, लेकिन आपस में निजी स्वार्थपूर्ति के लिए कदापि नहीं।                           कार्ल मार्क्स ने मजदूरों को अपनी हालत सुधारने का जो सूत्र ‘संगठित बनो व अधिकारों के लिए संघर्ष करो’ दिया था, वह आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक बना हुआ है। लेकिन, बड़ी विडम्बना का विषय है कि यह नारा आज ऐसे कुचक्र में फंसा हुआ है, जिसमें संगठन के नाम पर निजी स्वार्थ की रोटियां सेंकी जाती हैं और अधिकारों के संघर्ष का सौदा किया जाता है। मजदूर लोग अपनी रोजी-रोटी को दांव पर लगाकर एकता का प्रदर्शन करते हैं और हड़ताल करके सड़कों पर उतर आते हैं, लेकिन, संगठनों के नेता निजी स्वार्थपूर्ति के चलते राजनेताओं व पूंजीपतियों के हाथों अपना दीन-ईमान बेच देते हैं। परिणामस्वरूप आम मजदूरों के अधिकारों का सुरक्षा कवच आसानी से छिन्न-भिन्न हो जाता है। वास्तविक हकीकत तो यह है कि आजकल हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि मजदूर वर्ग मालिक (पूंजीपति वर्ग) व सरकार के रहमोकर्म पर निर्भर हो चुका है। बेहतर तो यही होगा कि पूंजीपति लोग व सरकार स्वयं ही मजदूरों के हितों का ख्याल रखें, वरना कार्ल मार्क्स के एक अन्य सिद्धान्त के अनुसार, ‘‘एक समय ऐसा जरूर आता है, जब मजदूर वर्ग एकाएक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं प्रवृत्ति वालों के लिए विनाशक शक्ति बन जाता है।’’
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

रविवार, 8 सितंबर 2013

क्या आप उस साईट पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मुझे आगे बढ़ने में सहयोग कर सकते हैं?

 
आदरणीय मित्रों ! ‘हिन्दी ब्लॉगिंग’ पर मेरे कुछ विचार ‘दैनिक जागरण’ की जागरण जंक्शन की ताजा प्रतियोगिता में प्रकाशित हुये हैं। क्या आप उस साईट पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मुझे आगे बढ़ने में सहयोग कर सकते हैं? यदि हाँ तो कृपा करके लॉग इन करिये:

http://bit.ly/13rhTKF

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार।

सोमवार, 19 अगस्त 2013

नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के कथित चुनाव एकदम गैर-कानूनी हैं - राजेश कश्यप

 नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के कथित  चुनाव एकदम गैर-कानूनी हैं - राजेश कश्यप
 
राजेश कश्यप
आजकल हरियाणा कश्यप राजपूत सभा (रजि. नं. 184) की नई प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी के जो कथित चुनाव करवाने के समाचार मिल रहे हैं, वे एकदम गैर-कानूनी हैं और समाज विरोधी मानसिकता का परिचायक हैं। इसे सभ्य समाज बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा। यह चेतावनी जारी करते हुए सभा के जिला प्रधान राजेश कश्यप, टिटौली ने आगे कहा कि इन चुनावों में कदम-कदम पर सभा के विधान का उल्लंघन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये चुनाव जो लोग करवा रहे हैं, वे बिल्कुल अवैधानिक हैं और किसी तरह के चुनाव करवाना उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। क्योंकि कानूनी तौरपर सभा के वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष जय भगवान कश्यप द्वारा न तो नये चुनावों की घोषणा की गई है और न ही वर्तमान कार्यकारिणी को भंग किया गया है। ऐसे मंे विधान के खिलाफ नए चुनाव करवाना बहुत बड़ा कानूनी और सामाजिक अपराध है।
जिला प्रधान राजेश कश्यप ने आगे बताया कि कुछ लोग निजी स्वार्थपूर्ति के लिए एकदम गैर-कानूनी व असामाजिक काम कर रहे हैं और बिना किसी सार्वजनिक घोषणा और नियम का पालन किए गुपचुप तरीके से फर्जी (डम्मी) पदाधिकारी चुने जा रहे हैं और उनसे पैंसे ऐंठे जा रहे हैं। श्री कश्यप ने समाज के नाम पर जारी चेतावनी में कहा है कि कोई भी व्यक्ति विधान के खिलाफ चुनाव करवाने वाले स्वार्थी लोगों के बहकावे में न आये और उन्हें किसी भी तरह की कोई धनराशि न दे। यदि इसके बावजूद कोई ऐसा करेगा तो वह अपने नुकसान का स्वयं जिम्मेदार होगा। राजेश कश्यप ने आगे बताया कि जब भी वैधानिक तौरपर सभा की प्रदेश कार्यकारिणी के चुनाव होंगे, उसकी घोषणा सार्वजनिक तौरपर की जायेगी, मीडिया के माध्यम से भी सूचना दी जायेगी और निष्पक्ष चुनावों के लिए हर कायदे-कानून की सतत पालना की जायेगी।

(मोबाईल नं. 09416629889)

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

संशोधित विधान पर आपके विचार एवं सुझाव आमंत्रित हैं

संशोधित विधान पर आपके विचार एवं सुझाव आमंत्रित हैं

परम आदरणीय मित्रो, सादर नमस्कार।

मित्रो ! हरियाणा कश्यप राजपूत सभा (रजि. 184) के मूल विधान में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये गये हैं, जोकि आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं। ये संशोधन मूल विधान में ही ‘रेखांकित/अंडर लाईन’ (Under Line) करके दर्शाये गये हैं। यह ‘प्रथम संविधान संशोधन, 2013’ के अन्तर्गत विचारार्थ रखे गये हैं, जिनके मूल उद्देश्य इस प्रकार हैं :

1. सभा के मूल विधान की कुछ खामियों और धाराओं की अस्पष्टता के चलते सभा के संचालन में आ रही परेशानियों को दूर करना।
2. सभा के कार्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्वों में पारदर्शिता लाना।
3. पदाधिकारियों को अनुशासनबद्ध बनाना और निरंकुश प्रवृत्ति से बचाना। साथ ही इन सभी पदाधिकारियों का सम्मान सुनिश्चित करना।
4. सभा को संभावित आपातकाल/विकट/विषम परिस्थितियों से बचाने के उपाय सुनिश्चित करना।
5. समाज के सर्वांगीण विकास, उन्नति, तरक्की एवं समृद्धि के लिए सभा की उपयोगिता बढ़ाना।

मित्रो! आपसे नम्र निवेदन है कि कृपा करके आप समाजहित में अपना थोड़ा सा समय निकालें और इन प्रस्तावित संशाधनों का अध्ययन करें। इसके बाद आप अपने अनमोल सुझावों और विचारों से लिखित रूप में पत्राचार/ईमेल/एसएमएस/फेसबुक आदि किसी भी विधि से अवगत करवाने का कष्ट करें। आपकी बड़ी मेहरबानी होगी। आपके जो भी विचार/सुझाव आयेंगे, उनका पूरा सम्मान होगा और सभा की आगामी राज्य स्तरीय बैठक में उन्हें रखा जायेगा। यदि आप उस बैठक में भाग लेने के इच्छुक हैं तो जरूर बताईयेगा, आपको सादर आमंत्रित किया जायेगा। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

राजेश कश्यप
जिला प्रधान, रोहतक।

पत्राचार का पता:
राजेश कश्यप,
प्रधान,
हरियाणा कश्यप राजपूत सभा रोहतक,
कश्यप भवन, पाना नं. 8, नजदीक शिव मन्दिर,
गाँव व डाकखाना. टिटौली,
जिला व तहसील. रोहतक
हरियाणा-124005

ईमेल: rajeshtitoli@gmail.com

मोबाईल नं. 09416629889

नोट: उपर्युक्त संविधान संशोधन की पीडीएफ फाईल के लिए अपना ईमेल देने वाले मित्रों को भेज दी गई है, जिनमें श्री देवेन्द्र निषाद, श्री संजीव कुमार, श्री राकेश कश्यप, श्री सुरेन्द्र सिंह कश्यप, श्री बलबी कश्यप, श्री ओम नारायण निषाद और श्री रमेश कुमार शामिल हैं। यदि आप भी ईमेल से इस संविधान संशोधन की पीडीएफ फाईल मंगवाना चाहते हैं तो कृपया अपना ईमेल मेरे मोबाईल नंबर पर भेजने अथवा नीचे कमेंट बॉक्स में लिखने का कष्ट करें। जल्द ही आपको ईमेल से पीडीएफ फाईल मिल जायेगी। धन्यवाद मित्रो। नमस्कार।
-: प्रस्तावित संशोधित विधान इस प्रकार है : - 








































बुधवार, 5 जून 2013

पेड़ समस्त सृष्टि का आधार: राजेश कश्यप

पेड़ समस्त सृष्टि का आधार: राजेश कश्यप

-पौधारोपण अभियान का शुभारम्भ

5 जून, रोहतक।
‘‘पेड़ समस्त सृष्टि का आधार हैं। पेड़ लगाने का सीधा मतलब है सृष्टि का सृजन व संवृद्धन और पेड़ काटने का मतलब सृष्टि का संहार। इसलिए हमें बेहतर व समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिएं और एक पेड़ काटा जाये तो उसकी पूर्ति के लिए दो पौधे रोपने चाहिएं।’’ ये आह्वान हरियाणा कश्यप राजपूत सभा के जिला प्रधान राजेश कश्यप ने टिटौली गाँव में पौधारोपण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए किया। 
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए आगे कहा कि बाढ़, भूकम्प, भूस्खलन, सूखा, असामयिक वर्षा, भयंकर गर्मी, सर्दी, तूफान आदि सब प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण प्रदूषण की ही देन हैं। इसका एकमात्र समाधान पौधारोपण है।
 श्री कश्यप ने समाज से गन्दगी पानी में बहाने, प्लास्टिक की थैलियां जलाने, खेतों में अंधाधूंध कीटनाशकों का प्रयोग करने जैसी व्यक्तिगत लापरवाहियों को छोड़ने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने पौधारोपण कार्यक्रम से बच्चों को जोड़ने और उन्हें मुफ्त में पौधे उपलब्ध करवाने की मुहिम चलाने की घोषणा भी की। 
इस अवसर पर दरियाव सिंह, महेन्द्र सिंह, श्रीमती कैलाशो देवी, पवन कश्यप, सुनील कुमार, सत्यवान कश्यप, बेबी स्वाती, सतीश कुमार, श्रीमती धौली, श्रीमती रामभतेरी, श्रीमती सीमा देवी, सूरज, मनोज कश्यप आदि उपस्थिति थे।