सोमवार, 21 जून 2010

हरियाणा कश्यप राजपूत सभा, रोहतक के तत्वाधान में पितृ दिवस पर ‘पितृ सम्मान समारोह’ आयोजित


‘माँ-बाप आपणी औलाद तैं सिर्फ प्यार के दो बोल चाहवैं सैं। जो औलाद आपणे माँ-बापां का कहणा मानैं सैं, वो सदा सुख पावै सै अर् स्वर्ग मं साझा करैं सैं। जो औलाद माँ-बापां की आत्मा नैं सतावैं सैं वे जिन्दगी मं कदे सुख नहीं पांदे अर् सीधे नरक कुण्ड में जावैं सैं।’ ये दिल के उद्गार ९० वर्षीय बुजुर्ग बल्लेराम के मुख से तब निकले जब हरियाणा कश्यप राजपूत सभा, रोहतक के तत्वाधान में पितृ दिवस पर आयोजित ‘पितृ सम्मान समारोह’ में उनके पुत्र ऋषि द्वारा सम्मानित किया गया।
‘पितृ सम्मान समारोह’ की अध्यक्षता सभा के प्रधान एवं युवा समाजसेवी राजेश कश्यप ने करते हुए कहा कि हमारे वेद-पुराण एवं मनुस्मृति के अनुसार पिता सौ आचार्यों के समान होता है और माँ एक हजार पिताओं के समान होती है। इसलिए हमें अपने माता-पिता की शिक्षा, संस्कार एवं आदेशों का हमेशा पालन करना चाहिए। श्री कश्यप ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता की कभी भी अनदेखी न करें।
पितृ सम्मान से सम्मानित महेन्द्र सिंह कश्यप ने कहा कि जो संतान अपने माता-पिता का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लेकर चलेगी, वह हमेशा सफलता की बुलन्दियों को छुती है।
सभा के खजांची सत्यवान कश्यप ने इस अवसर पर कहा कि माता-पिता की सेवा ही भगवान की सेवा है। जो माँ-बाप के संस्कारों को नहीं भूलता, वह समाज में सदा सम्मान पाता है।
इस अवसर पर अनेक वक्ताओं ने आधुनिक युवा पीढ़ी द्वारा बरती जा रही माता-पिता के प्रति घोर उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि भविष्य में ऐसा ही चलता रहा तो हमारे समाज का पतन निश्चित है। समारोह में प्रधान राजेश कश्यप की अध्यक्षता में मनोज, पवन, अन्नू, सूरज, सुमीत, ऋषि, प्रवीण, अजय, सतदेव, विनोद, सत्यवान, सतपाल, जयभगवान, राजेश आदि अनेक युवाओं ने अपने पिताओं को अनेक उपहारों से सम्मानित किया और उनका आर्शीवाद ग्रहण करने के साथ-साथ उनकी सेवा करने का दृढ़ संकल्प लिया।


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